





विपक्ष को भुगतना होगा आने वाले चुनाव में परिणाम : प्रियंका अग्रवाल
काशीपुर । विगत दिवस लोकसभा में महिला आरक्षण को लागू करने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक (131वां संशोधन)विपक्ष द्वारा पारित न होने देने पर अखिल भारतीय अग्रवाल महासभा उत्तराखंड की प्रदेश अध्यक्ष एवं प्रांतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल की महिला मोर्चा की काशीपुर जिला अध्यक्ष प्रियंका अग्रवाल ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने ने इसे “नारी शक्ति के साथ विश्वासघात” और एक “काला दिन” बताया है।
उन्होंने ने कांग्रेस और ‘इंडिया ब्लॉक’ (INDIA Bloc) के अन्य विपक्षी दलों को “महिला विरोधी” करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने अपने राजनीतिक हितों के लिए महिलाओं के सशक्तिकरण के मुद्दे को रोका। प्रियंका अग्रवाल ने कहा कि सरकार महिला आरक्षण लागू करने के लिए संशोधन बिल लायी, लेकिन विपक्ष ने इसके खिलाफ वोट किया. उन्होंने इसे देश की महिलाओं के साथ धोखा बताया. उन्होंने बताया कि विपक्ष द्वारा संसद में महिला विरोधी बातें कही गईं, जिसे देश की महिलाएं देख रही हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि INDI गठबंधन ने महिलाओं की उम्मीदों को तोड़ा है. उन्होंने कहा कि विपक्ष महिलाओं की आवाज दबाना चाहता है जिससे मातृशक्ति मे आक्रोश है । इसका परिणाम आने वाले चुनाव में विपक्ष को भुगतना पड़ेगा : प्रियंका अग्रवाल
नारी शक्ति का विषय वोट-बैंक या पक्ष-विपक्ष का नहीं है। ये राष्ट्र निर्माण का मुद्दा है। सभी दलों को अहंकार छोड़कर बहनों को उनका हक देना चाहिए। विरोध के लिए विरोध से देश की 50% आबादी का नुकसान हुआ है।
*एड. मोनिका गुप्ता
नारी शक्ति वंदन अधिनियम बिल पास न होने पर महिलाओं का क्रोध आक्रोश बिल्कुल सही है।। जब महिलाओं को घर चलाने में काम करने में पूरा हक दिया जाता है तो फिर कमाने में या किसी भी फैसले को लेने में हक क्यों नहीं दिया जाता अगर वह घर चला सकती है तो वह काम भी सकती है और खिला भी सकती है उसे पूरा हक है कि वह दुनिया में अपनी पहचान बनाएं और लोगों के द्वारा उसे सम्मान मिले हर विषय में हर जगह बराबर का हिस्सा मिलना चाहिए तभी हमारा भारत तरक्की कर पाएगा वरना और देश से हमेशा पीछे रहेगा जय हिंद : भावना अग्रवाल
नारी शक्ति वंदन अधिनियम बिल पास न होने देना बिपक्ष की नारी शक्ति के प्रति कुंठित मानसिकता का परिचय हैं. वे भूल गए की हम आज की नारी है जुबान भी है और आवाज भी. हम अपना अधिकार लेना जानते है, और हौसला भी रखते,. बेहद अपमानित महसूस कर रही सामान्य सी महिला केयो की वे उम्मीद मे थी उनकी वोट पाकर उसदन तक गए है वे हमारे साथ देंगे मगर नहीं मिला,
स्थान :सुधा राय
महिलाओं को अपनी जिंदगी का फैसला लेने की स्वतंत्रता देना और उन्हें शिक्षित व आत्मनिर्भर बनाना ही वास्तविक सशक्तिकरण है।
महिलाओं को केवल देवी न मानें, बल्कि उन्हें समाज में बराबरी का हक, शिक्षा और सुरक्षा प्रदान करें। यह समय महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने और उन्हें घर की चहारदीवारी से बाहर निकलकर राष्ट्र निर्माण में भागीदार बनाने का है :तनवी अग्रवाल
आज महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति जागरूक में सजक व सशक्त है प्रगति के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ रही है राजनीतिक व धार्मिक कार्यों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेती हैं अपने सम्मान में अधिकारों के लिए लड़ना जानती हैं और समाज में अपना स्थान बनाते हुए आगे बढ़ रही हैं जब भी महिलाओं को और सशक्त में उनका हक देने की बात आती है विपक्ष हमेशा बड़ा बनकर खड़ा हो जाता है महिला बिल पास में होने देना इसका उदाहरण है और इसका परिणाम आगे समय में भुगतना होगा :
एडवोकेट ज्योति शर्मा