नगर निगम ने राजस्व बढ़ोतरी के लिए कसरत की तेज, विभागों से मंगाया जा रहा डेटा

देहरादून: नगर निगम का वित्तीय वर्ष का अंतिम तिमाही चल रहा है और अंतिम तिमाही में अधिक से अधिक टैक्स वसूली को लेकर नगर निगम ने कसरत शुरू कर दी है. नगर ने टैक्स वसूली का राजस्व बढ़ाने के लिए एमडीडीए से कॉमर्शियल प्रतिष्ठानों की करीब 1500 सूची मंगाई जा रही और जिन पर काम चल रहा है. जिन प्रतिष्ठानों ने नगर निगम में टैक्स देना शुरू नहीं किया है, इनसे टैक्स इंस्पेक्टर संपर्क कर रहे हैं. वहीं नगर निगम का वित्तीय वर्ष 2025-2026 का लक्ष्य करीब 75 करोड़ है और अब तक निगम में टैक्स 40 करोड़ रुपए का राजस्व जमा हो चुका है. साथ ही नगर निगम द्वारा वार्डो में कैंप लगाए जा रहे हैं।

बता दें कि नगर निगम इस वित्तीय वर्ष में 75 करोड़ का लक्ष्य है और अब तक 40 करोड़ रुपए का टैक्स राजस्व आया है. लक्ष्य की बाकी धनराशि को प्राप्त करने के लिए भी प्रयास तेज कर दिए गए हैं. आमतौर पर फरवरी और मार्च में ही सबसे अधिक राजस्व नगर निगम में आता है. नगर निगम द्वारा नए निर्माण पर टैक्स निर्धारण कर वसूली के प्रयास किया जा रहे हैं. तीन साल के भीतर एमडीडीए से नक्शा पास होने का रिकॉर्ड मंगाने के बाद उस पर काम किया जा रहा है और नगर निगम क्षेत्र में करीब 1500 कमर्शियल प्रतिष्ठान नए निर्मित होने का पता चला है।

जिस पर नगर निगम की ओर से उन्हें नोटिस भेज कर मूल्यांकन करने और टैक्स भुगतान के नोटिस भेजे जा रहे हैं.अब तक करीब 500 प्रतिष्ठानों से संपर्क किया जा चुका है और नोटिस भेज कर उन्हें जल्द से जल्द टेक्स्ट भुगतान के लिए प्रेरित किया जा रहा है. साथ ही नगर निगम के जोनल कार्यालयों में कर वसूली के शिविर आयोजित किया जा रहे हैं. साथ ही करदाताओं को व्हाट्सएप पर मैसेज भेज कर रिमाइंडर कराया जा रहा है।

 

नगर आयुक्त नमामि बंसल ने बताया है कि एमडीए से नक्शे पास होने की सूची मांगी गई थी, जिसमें पिछले तीन सालों में करीब 3000 कमर्शियल प्रतिष्ठान देहरादून जिले में निर्मित होने की जानकारी मिली है. जिनमें से करीब 1500 प्रतिष्ठान नगर निगम क्षेत्र में आते हैं, इन सभी से कर वसूली का प्रयास किया जा रहा है. साथ ही कर अनुभाग कैंप के माध्यम से टैक्स वसूली कर रहा है और कैंप की व्यवस्था अगले महीने भी चलने वाली है. साथ ही लगातार प्रयासों के माध्यम से और अन्य एजेंसी एमडीडीए, यूपीसीएल व जल संस्थान के पास जो डेटा उपलब्ध हैं, उनके साथ समन्वय बनाते हुए संबंधित करदाताओं को टैक्स देने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

 





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