भ्रम तोड़ें। मजबूत रक्त बनाएं। बच्चों का भविष्य सुरक्षित करें : डॉ रवि सहोता

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काशीपुर । विश्व एनीमिया जागरूकता दिवस 2026 के अवसर पर Indian Academy of Pediatrics (IAP) Uttarakhand बच्चों में एनीमिया से जुड़े भ्रम (मिथ्स) को तोड़ने और वैज्ञानिक तथ्यों को जन-जन तक पहुँचाने का आह्वान करता है।

एनीमिया—विशेषकर आयरन की कमी से होने वाला एनीमिया—एक रोकथाम योग्य और उपचार योग्य बीमारी होने के बावजूद आज भी भारत में बड़ी संख्या में बच्चों को प्रभावित कर रहा है। 5 वर्ष से कम आयु के लगभग 60–70% बच्चे एनीमिया से ग्रस्त हैं, जिसका एक बड़ा कारण गलत धारणाएँ, देर से पहचान और इलाज में लापरवाही है। 

एनीमिया से जुड़े आम भ्रम जिन्हें तोड़ना जरूरी है
• एनीमिया कोई छोटी समस्या है — वास्तव में यह बच्चे की वृद्धि, रोग-प्रतिरोधक क्षमता और मस्तिष्क विकास को नुकसान पहुँचा सकता है।
• सिर्फ कमजोर या दुबले बच्चे ही एनीमिया से पीड़ित होते हैं — स्वस्थ दिखने वाले बच्चे भी एनीमिक हो सकते हैं।
• आयरन की दवाइयाँ नुकसानदायक होती हैं — सही मात्रा में दी जाएँ तो ये पूरी तरह सुरक्षित और जीवनरक्षक हैं।
• सिर्फ खान-पान से एनीमिया ठीक हो जाता है — मध्यम व गंभीर एनीमिया में आयरन सप्लीमेंट अनिवार्य है।
• हीमोग्लोबिन ठीक होते ही आयरन बंद किया जा सकता है — आयरन कम से कम 2–3 महीने तक जारी रखना जरूरी है ताकि शरीर के भंडार भर सकें।

यह इतना महत्वपूर्ण क्यों है
शैशव और प्रारंभिक बाल्यावस्था में आयरन की कमी से सीखने की क्षमता, व्यवहार और स्कूल प्रदर्शन पर लंबे समय तक नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

सामूहिक अपील
IAP उत्तराखंड अभिभावकों, शिक्षकों, स्वास्थ्यकर्मियों, अस्पतालों और मीडिया से अपील करता है कि वे:
• एनीमिया की समय पर जाँच और इलाज को बढ़ावा दें
• आयरन-फोलिक एसिड सप्लीमेंटेशन का सही पालन सुनिश्चित करें
• एनीमिया मुक्त भारत जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों को मजबूत करें
• समाज में फैले भ्रम दूर कर सही जानकारी फैलाएँ

आइए, मिलकर भ्रमों को तथ्यों से बदलें और सुनिश्चित करें—
मजबूत रक्त, स्वस्थ बच्चे और सशक्त भारत।

डॉ. रवि सहोता
अध्यक्ष, IAP उत्तराखंड (2026)
डॉ राकेश कुमार सचिव IAP उत्तराखंड

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