
काशीपुर। एक साल… लेकिन काम ऐसा कि जैसे काफी वर्षों का हिसाब बराबर हो गया हो। नगर निगम काशीपुर के महापौर दीपक बाली ने बीते एक वर्ष में यह साबित कर दिखाया कि अगर नीयत साफ हो और इरादे मजबूत हों, तो समय कभी बाधा नहीं बनता।
कहते हैं कि नेतृत्व समय से नहीं, दृष्टि और निर्णय से पहचाना जाता है। नगर निगम काशीपुर के महापौर दीपक बाली ने अपने एक वर्ष के कार्यकाल में इस कहावत को सच कर दिखाया है। महज एक साल में उन्होंने ऐसा काम कर दिखाया, जिसकी गूंज अब शहर की गलियों से निकलकर राज्य और केंद्र तक सुनाई दे रही है।
एक साल, लेकिन काम कई वर्षों जितना
दीपक बाली का यह पहला साल सिर्फ एक औपचारिक कार्यकाल नहीं रहा, बल्कि यह विकास का मिशन बन गया। उन्होंने जो कहा, उसे कागज़ों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि जमीन पर उतारकर दिखाया। यही वजह है कि आज काशीपुर की जनता उन्हें सिर्फ महापौर नहीं, बल्कि अपना जनता का मसीहा मानती है।
जो कहा, वो किया—और करके दिखाया
दीपक बाली का पहला साल सिर्फ कार्यकाल नहीं, बल्कि विकास की गारंटी बनकर सामने आया। सड़कों से लेकर नालियों तक, चौराहों से लेकर पौराणिक स्थलों तक—काशीपुर की तस्वीर और तकदीर दोनों बदलती नजर आ रही है ।
नगर निगम नहीं, जनता का दरबार
महापौर बनते ही बाली ने नगर निगम को जनता के लिए खोल दिया। नियमित रूप से लगने वाले जनता दरबार में आम नागरिक अपनी समस्या लेकर पहुंचे और उन्हें वहीं समाधान मिला। सड़क, नाली, जलभराव, सफाई या अन्य नगर निगम से जुड़ी समस्याएं—अब फाइलों में नहीं उलझतीं, बल्कि मौके पर ही निपटती नजर आती हैं।
सुख-दुख में साथ, यही असली राजनीति
दीपक बाली की खास पहचान यह रही कि वे सिर्फ दफ्तरों तक सीमित नहीं रहे। शहर का कोई सामाजिक, धार्मिक या वैवाहिक कार्यक्रम हो, किसी परिवार का सुख हो या दुख—बाली हर जगह जनता के साथ खड़े नजर आए। यही जुड़ाव उन्हें भीड़ से अलग करता है और जनता के दिलों में जगह दिलाता है।
टूटी सड़कों से निजात, विकास की रफ्तार
एक साल पहले तक जिन गलियों और मोहल्लों की सड़कों को लोग कोसते थे, आज वहीं नई सड़कें विकास की पहचान बन चुकी हैं। महज एक वर्ष में शहरभर में सड़कों का जाल बिछाया गया। बरसात के मौसम में बाजारों में होने वाला जलभराव वर्षों से बड़ी समस्या था, जिसका स्थायी समाधान कर जनता को बड़ी राहत दी गई।
चौराहों से पौराणिक स्थलों तक बदली तस्वीर
काशीपुर के प्रमुख चौराहों और पौराणिक स्थलों को नई पहचान देने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए गए। सौंदर्यीकरण, प्रकाश व्यवस्था और सुविधाओं के विस्तार से शहर अब सिर्फ रहने की जगह नहीं, बल्कि गर्व करने का कारण बनता जा रहा है। इस पहल को जनता ने खुले दिल से सराहा।
हर वर्ग को साथ लेकर चला विकास
बाली की राजनीति का आधार सिर्फ योजनाएं नहीं, बल्कि समावेशी सोच रही। व्यापारी, श्रमिक, युवा, महिलाएं और वरिष्ठ नागरिक—हर वर्ग को संतुष्ट रखने का प्रयास किया गया। यही कारण है कि शहर में असंतोष नहीं, बल्कि भरोसा दिखाई देता है।
राज्य से केंद्र तक मजबूत पहचान
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की दूरगामी सोच को काशीपुर में धरातल पर उतारने में दीपक बाली की भूमिका अहम रही है। राज्य से लेकर केंद्र तक बनाई गई उनकी मजबूत पहचान का सीधा फायदा काशीपुर को मिलता नजर आ रहा है। ऐसे विकास कार्य आगे बढ़ाए गए, जिनकी चर्चा आज पूरे प्रदेश ही नहीं, देशभर में हो रही है।
जन-जन की आवाज बने बाली
महज एक साल में ही दीपक बाली ने तमाम जनप्रतिनिधियों को पीछे छोड़ते हुए खुद को जन-जन की आवाज के रूप में स्थापित कर लिया है। वे सिर्फ समस्याएं नहीं सुनते, बल्कि समाधान की जिम्मेदारी भी खुद उठाते हैं।
विकास के दम पर विपक्ष मौन
विकास की रफ्तार इतनी तेज रही कि विरोधियों के पास कहने को कुछ बचा ही नहीं। आरोपों और आलोचनाओं का जवाब बाली ने भाषणों से नहीं, बल्कि काम से दिया। यही वजह है कि आज विपक्ष के मुंह पर ताला लगा नजर आता है।
आज चुनाव हो जाए तो जनता का फैसला तय
शहर की जनता के बीच यह चर्चा आम है कि
अगर आज चुनाव हो जाए, तो काशीपुर का एक ही नाम होगा—दीपक बाली।
क्योंकि जनता अब वादों पर नहीं, काम पर भरोसा करती है।