26 जनवरी ओर पति मेयर के जन्मदिन पर उर्वशी बाली का बच्चों को संदेश

काशीपुर। डी बाली ग्रुप की डायरेक्टर एवं समाजसेवी उर्वशी दत्त वाली ने आज के बच्चों के दिखावे की दौड़ में तेज़ी से आगे बढ़ने पर गहरी चिंता व्यक्त की है और बच्चों को संदेश दिया है कि देश और दुनिया में जितने भी महापुरुष और महान हस्तियां हुई उन्होंने कभी भी दिखावे की जिंदगी नहीं जी और ब्रांडेड कपड़ों के बजाय उन्होंने हमेशा साधारण वेशभूषा पहनी। चाहे भारत माता के अमर सपूत पंडित लाल बहादुर शास्त्री हो या फिर एपीजे अब्दुल कलाम अथवा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी। आज के समय में ब्रांडेड वेशभूषा से ही ऊंचे कद का एहसास कराया जा रहा है जबकि होना चाहिए की साधारण जीवन और उच्च विचार। हो उल्टा रहा है और साधारण वेशभूषा वाले को कमतर आंका जाता हैलेकिन इतिहास गवाह है कि जिन लोगों ने देश और समाज को दिशा दी उनकी जिंदगी साधारण थी।

श्रीमती बाली कहती हैं कि आज की युवा पीढ़ी को यह समझना होगा कि आपका ब्रांडेड सामान लोग केवल दो दिन देखते हैं, लेकिन आपका व्यक्तित्व और आपकी मेहनत आपको पूरी ज़िंदगी की पहचान दिलाती है। कपड़े बदल जाते हैं, मोबाइल मॉडल बदल जाता है, फैशन बदल जाता है, लेकिन इंसान की पहचान वही रहती है जो उसने खुद बनाई होती है।

पैसा कमाना गलत नहीं है, लेकिन उसे कहाँ खर्च करना है, किस चीज पर करना है,यही असली समझदारी है। अगर आपके पास पैसा है, तो उसका कम से कम 10 प्रतिशत अपने ऊपर लगाइए, लेकिन कपड़ों के टैग पर नहीं, अपने विकास पर, किताबों, शिक्षा, स्किल सीखने, सेहत और सोच पर निवेश कीजिए। थोड़ी-सी पूंजी से भी इंसान खुद को इतना मजबूत बना सकता है कि फिर किसी ब्रांड की जरूरत ही न पड़े।

आज हर कोई दिखने में व्यस्त है, कुछ बनने में नहीं।रील,फोटो और सोशल मीडिया के दिखावे ने युवाओं को घेर लिया है। सोशल मीडिया पर लाइक मिल जाते हैं, लेकिन असली जीवन में सम्मान केवल मेहनत, ईमानदारी और काबिलियत से मिलता है। जो लोग खुद पर काम करते हैं, उन्हें दिखावा करने की जरूरत नहीं पड़ती।। अपने पति महापौर दीपक वाली के 52वें जन्मदिन पर उनकी पत्नी उर्वशी दत्त बाली ने उनके जीवन से जुड़ा प्रेरणादायक संदेश साझा किया। उन्होंने कहा कि दीपक बाली ने हमेशा मेहनत और ईमानदारी को प्राथमिकता दी और दिखावे को पीछे रखा, ओर आज शहर का हर व्यक्ति हर युवा भी उन की जी तोड़ मेहनत को अपनी आंखों से देख भी रहा है। “कभी उन्हें थकान में नहीं देखा, हमेशा चेहरे पर मुस्कान रही, ओर सदा काम करते देखा,इतनी मेहनत की कि यदि पर्वत भी उठाना पड़े तो मेहनत से नहीं घबराएं मैं उन्हें पिछले 25 वर्ष से देख रही हूं उन्होंने कभी ब्रांड से खुद को ऊँचा नहीं दिखाया ना किसी ब्रांड को प्राथमिकता दी, बल्कि जीतोड़ मेहनत कर खुद को ब्रांड बनाया।उनका मानना है कि ब्रांड केवल पैसे की बर्बादी और चार दिन का झूठा दिखावा है, जबकि असली ब्रांड जी-तोड़ मेहनत, ईमानदारी और जनता के लिए समर्पण से बनता है। बच्चों समय बहुत कीमती है और यह रोज़ वापस नहीं आता।
आप को यह उम्र, यह समय और यह ऊर्जा बार-बार नहीं मिलेगी। समय तेज़ी से निकल रहा है और हम सब हर दिन आगे बढ़ रहे हैं। अगर बच्चों आपने आज खुद को नहीं पहचाना और खुद पर काम नहीं किया, तो कल दुनिया आपको केवल भीड़ का हिस्सा समझेगी।

अंत में सच्चाई यही है कि कपड़ों का ब्रांड बदल जाता है, मोबाइल का मॉडल बदल जाता है, लेकिन आपकी पहचान वही रहती है जो आपने खुद बनाई है। इसलिए ब्रांड पहनने की दौड़ छोड़िए और खुद को ब्रांड बनाइए, क्योंकि असली ब्रांड आप हैं—जो पूरी ज़िंदगी दिखता है, सिर्फ दो दिन नहीं।

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