देहरादून: उत्तराखंड में चुनावी बिगुल बजने ही वाला है. इसके साथ ही अब विपक्षी दल पूरी तरह से अलर्ट और सक्रिय हो गए हैं. वर्तमान स्थिति यह है कि विपक्षी दल के पास तमाम ऐसे मुद्दे हैं, जिसके जरिए बीजेपी को घेरने की कवायद में जुटा हुआ है. जहां एक ओर विपक्ष एसआईआर, शुद्धिकरण, महिला सुरक्षा समेत अन्य तमाम मुद्दे को उठा रहा है, तो वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने बीजेपी विधायकों की नाकामियों को उजागर करने की रणनीति भी तैयार की है. उधर भाजपा इस पूरे मामले को लेकर कांग्रेस पर तंज कसती नजर आ रही है. ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि आगामी विधानसभा चुनाव नाकामियों वर्सेस उपलब्धियों पर लड़ा जा सकता है? पढ़िए ईटीवी भारत की खास रिपोर्ट.
उत्तराखंड में इलेक्शन वॉर का ‘चक्रव्यूह’: उत्तराखंड राज्य में आगामी साल 2027 में विधानसभा के चुनाव होने हैं. इसके मद्देनजर प्रदेश में चुनावी बिगुल बजने वाला है. साथ ही प्रदेश की दोनों मुख्य पार्टियां भाजपा और कांग्रेस, चुनावी रणनीतियों पर काम कर रही हैं, ताकि चुनाव को जीत सत्ता पर काबिज हो सकें. लेकिन इस चुनावी में तमाम ऐसे मुद्दे चर्चाओं का विषय बने हुए हैं, जिन्हें विपक्ष आगामी चुनाव के लिए काफी महत्वपूर्ण मान रहा है. हालांकि हर चुनाव के दौरान महंगाई, बेरोजगारी, महिला सुरक्षा, पलायन, स्वास्थ्य समेत तमाम मुद्दे चुनाव में हावी रहते हैं. लेकिन अब विपक्ष ने इन महत्वपूर्ण मुद्दों के साथ ही बीजेपी विधायकों की नाकामियों को जनता के बीच ले जाने का निर्णय लिया है.
नाकामियों और उलब्धियों पर लड़ा जाएगा चुनाव: उत्तराखंड में इन दिनों एसआईआर का मुद्दा काफी अधिक चर्चाओं में है. इसके पीछे की मुख्य जगह यही है कि प्रदेश में फॉर्म 7 के जरिए 1.07 लाख मतदाताओं का नाम डिलीट किए जाने को लेकर आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं. इसमें कांग्रेस विधायक फुरकान अहमद का भी नाम शामिल है, जिसके चलते मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस एसआईआर प्रक्रिया पर सवाल उठाती नजर आ रही है. वर्तमान समय में जहां एक ओर विपक्ष इस मुद्दे को जोर शोर से उठा रहा है, तो वहीं आगामी विधानसभा चुनाव के दौरान भी विपक्ष का एसआईआर एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहने वाला है. यही वजह है कि कांग्रेस, एसआईआर के दौरान चल रही कथित धांधलियों की पूरी रिपोर्ट तैयार कर रही है, ताकि चुनाव के दौरान जनता तक इसे पहुंचाया जा सके.
कांग्रेस का हथियार बनेंगे ये मुद्दे: एसआईआर के अलावा कांग्रेस, बीजेपी को दलित विरोधी साबित करने पर भी जोर दे रही है. इसके पीछे की मुख्य वजह यही है कि हल्द्वानी में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़के की हुई जनसभा के बाद एक समिति की ओर से वहां पर शुद्धिकरण यज्ञ किया गया. मामला सामने आने के बाद विपक्षी दल कांग्रेस इस मुद्दे को भुनाने की कवायद में जुट गई है. भले ही भाजपा पूरे मामले पर अपना स्पष्टीकरण दे रही हो कि यह उन्होंने नहीं किया है और जिन लोगों ने किया है वह उनके कार्यकर्ता नहीं हैं. बावजूद इसके विपक्षी दल कांग्रेस इसे महत्वपूर्ण मुद्दा मानते हुए आगामी चुनाव में भुनाने की तैयारी कर रही है. इसके अलावा, अयोध्या राम मंदिर और बदरीनाथ धाम में हुई चंदा चोरी मामले को भी बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी में है.
कांग्रेस की दो हफ्ते में तीन बैठकें: प्रतिमा सिंह ने इसके साथ ही कहा कि इन्हीं मुद्दों को लेकर पिछले 15 दिनों से 3 से ज्यादा बैठकें हो चुकी हैं. एसआईआर को लेकर विधानसभा वार प्रभारी नियुक्त किये जा चुके हैं, ताकि किसी भी मतदाता के वोट अधिकार का हनन न हो पाए.
इसके लिए जल्द ही विधानसभा वार प्रभारी और सह प्रभारी भी नियुक्त किए जाएंगे. ये प्रभारी बीजेपी विधायकों के सच को जनता तक ले जाने का काम करेंगे. इसके साथ ही कांग्रेस की घोषणा पत्र के लिए जनता से भी सुझाव मांगे गए हैं.
विनोद चमोली, बीजेपी विधायक और प्रवक्ता-चमोली ने कहा कि ऐसे में कांग्रेस एक नकारात्मक सोच के साथ चुनावी मैदान में उतरना चाहती है, जिसका जवाब भाजपा देगी. भाजपा की तमाम उपलब्धियां हैं जिनको जनता के बीच रखा जाएगा. विधायकों के कामों को जनता के बीच रखा जाएगा.
विनोद चमोली ने कहा कि लिहाजा, नेगेटिव सोच के साथ अगर कोई उत्तराखंड में चुनाव लड़ेगा, तो उसका नुकसान होगा.